---------- Forwarded message ---------- From: ujjwala mhatre <[email protected]> Date: Sat, 3 May 2014 12:01:35 +0530
Dear friends, Sharing a poem sent by a friend. सादिया हसन, मेरी चाय को तुम्हारी फूंक चाहिए ____________________________ मेरी चाय को तुम्हारी फूंक चाहिए सादिया हसन ये चाय इतनी गर्म कभी न थी इसकी मिठास इतनी कम कभी न थी. मैं सूंघता हूँ मुल्क की हवा में लहू की गंध है कल मेरे कमरे पर आये लड़के ने पूछा मुझसे कि क्रिया की प्रतिक्रिया में पेट फाड़ अजन्मे शिशु को मार देंगे क्या बलात्कार के बाद लाशें फूंक जला देंगे क्या हम दोनों फिर चुप रहे सादिया हसन हमारी चाय रखी हुई ठंडी हो गई. हम फूलों तितलियों शहद की बातें करते थे हम हमारे दो अजनबी शहर की बातें करते थे हम चाय पर जब भी मिलते थे बदल लेते थे नजर चुरा हमारे चाय की ग्लास पहली बार तुम्हारी जूठी चाय पी तो तुमने हे राम कहा था मेरा खुदा तुम्हारे हे राम पर मर मिटा था. पर उस सुबह की चाय पर सबकुछ बदल गया सादिया हसन एक और बार अपने असली रंग में दिखी ये कौमें ..नस्लें .. यह मेरा तुम्हारा मादरे वतन टी वी पर आग थी.. खून था.. लाशें थीं उस दिन खरखराहट थी तुम्हारे फोन में आवाज़ में तुमने चाय बनाने का बहाना कर फोन रख दिया. मैं जानता हूँ उस दिन तुमने देर तक उबाली होगी चाय मैंने कई दिन तक चाय नहीं पी सादिया हसन. मैं तुम्हारे बदले से डरने लगा क्रिया की प्रतिक्रिया पर अब क्या दोगी प्रतिक्रिया इस गुजार में रोज मरने लगा जब भी कभी हिम्मत से तुम्हें कॉल किया बताया गया तुम चाय बनाने में व्यस्त हो मैंने जब भी चाय पी आधी ग्लास तुम्हारे लिए छोड़ दी. गुजरात ने हम दोनों को बदल दिया था सादिया हसन. ठंडी हो गई ख़बरों के बीच तुम्हारी चिट्ठी मिली थी- "गुजरात बहुत दूर है यहाँ से और वे मुझे मारने आये तो तुम्हारा नाम ले लूँगी तुम्हें मारने आयें तो मेरे नाम के साथ कलमा पढ़ लेना और मैं याद करुँगी तुम्हें शाम सुबह की चाय के वक़्त तुम्हारे राम से डरती रहूंगी ताउम्र मेरे अल्लाह पर ही मुझे अब कहाँ रहा यकीन" तुम्हारे निकाह की ख़बरों के बीच फिर तुम गायब हो गई सादिया हसन मैंने तुम्हारा नाम उसी लापता लिस्ट में जोड़ दिया जिस लिस्ट में गुजरात की हजारों लापता सादियाओं समीनाओं के नाम थे नाम थे दोसाला चार साल बारहसाला अब्दुलों अनवरों के. हजारों चाय के ग्लास के साथ यह वक़्त गुजर गया. मैं चाय के साथ अभी अखबार पढ़ रहा हूँ सादिया हसन खबर है कि गुजरात अब दूर नहीं रहा वह मुल्क के हर कोने तक पहुँच गया है मेरे हाथ की चाय गर्म हो गई है ये चाय इतनी गर्म कभी न थी इसकी मिठास इतनी कम कभी न थी सादिया हसन, मेरी चाय को तुम्हारी फूंक चाहिए. _________ शायक -- www.aksharacentre.org standupagainstviolence.org <https://www.facebook.com/AksharaCentre> *[email protected] *Warm Regards Ujjwala Mhatre -- Peace Is Doable -- You received this message because you are subscribed to the Google Groups "Green Youth Movement" group. To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to [email protected]. To post to this group, send an email to [email protected]. Visit this group at http://groups.google.com/group/greenyouth. For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.
